16 नवंबर 2009

मीडिया के पास ख़बर नही!

मीडिया के पास ख़बर की कमी है। आज मीडिया ख़बर कम बकवास जयादा दिखा रही है। टीआरपी के खेल मे समाचार चैनल लोगों से कटता जा रहा है। आज जब भी समाचार के लिए चैनल खोलता हूँ तो कभी दाती महाराज की बकवास भरी चुटकुले आ रहा होता है अथवा बिग बॉस की नौटंकी। चैनल देखने का मन अब नहीं करता और इसका कारण चैनलों का चिल्लाना भी है। चैनलों का chillahat ही है की समाचार देखने के लिए घंटों इंतजार करने के बाद भी कोए समाचार हाथ नही लगता । कभी पाकिस्तान की खबर तो कभी नकली नोट का। आम आदमी की ख़बर अब चैनलवाले चलाना पसंद नही करते या फ़िर पत्रकार ऐसी ख़बर बनते नहीं। देश की राजधानी में ही कई बरी ख़बर है पर उसकी तरफ़ से मुहं मोर कर हम चल देतें है। चैनल पर परेम टाइम मे बरी ख़बर आती है पर उसमें भी आम आदमी नजर कम ही आता है।

13 नवंबर 2009

कोरा और राज के लिए कांग्रेस को सजा हो.

राज ठाकरे और मधु कोरा कांग्रेस की देन है। कांग्रेस की इस गलती की उसे सजा मिलनी चाहिए। कोरा और राज के पास खोने के लिए कुछ नही है। यदि किसी को लूटने और मारने की छूट हो तो वह वही काम करेगा और दोनों को सरकार ने यह छूट दी है। दोनों घटना साबित करती है की देश नेताओं के लिए कुछ नही, सत्ता के लिए कुछ भी करेगें। राज प्रकरण पर मिडिया को थोरा सावधान रहना चाहिय। राज प्रचार चाहता है और मीडिया वह दे रही है। कोरा प्रकरण पर भी मिडिया कटघरे मे है। जब कोरा लूट रहे थे तो मिडिया भी सहभागी था। मिडिया को भी करोरों का ऐड मील रहा था और फ़िर मिडिया जो आज चिल्ला रही है पहले कहाँ थी जब लूट हो रहा था यानी इस हमाम मे हम सभी नंगे है.

10 नवंबर 2009

प्रभास जोशी नही रहे !

पत्रकारिता जगत के एक ऐसे स्तम्भ का चला जाना निश्चित ही दुखद है जिन्होंने आदर्शो को अपने साथ जिया। प्रभास जोशी का जाना वैसा ही है जैसा की घनघोर अंधेरे मे टिमटिमाते एक दीया का बुझ जाना। पत्रकारों के लिए प्रभास जी प्रकाश पुंज की तरह थे जिसे टिमटिमाता देख बादशाह के द्वारा कराके की सर्दी में मौत की सजा पाने वाले का रात भर तलाव में गुजारना।प्रभास जी को दूर दिल्ली में ही नहीं बिहार के एक कस्बाई नगर बरबीघा मे भी शिददत से याद किया जा रहा है। प्रभास जी को याद करते हुए शेखपुरा जिला के बरबीघा में स्थित नवजीवन अशोक पुस्तकालय विमर्श गोष्टी का आयोजन किया गया जिसमे स्थानिये पत्रकारों के अलावा बारी संख्या बुद्हीजिबी मौजूद थे। गोष्टी में प्रभास जी के द्वारा मिडिया के बाजारीकरण का बिरोध किए जाने का मुद्दा बोलते रहा। खास कर प्रभास जी का बेबाकीपन और साहस की चर्चा करते हुआ डॉ नागेश्वर ने कहा की जोशी को aadarsh मन यदि पत्रकारिता किया जे तो देश के आगे कोई समस्या नही रहेगी।




मोनू खान

मोनू खान। फुटपाथ पर बुक स्टॉल चलाते वक्त मित्रता हुई और कई सालों तक घंटों साथ रहा। मोनू खान, ईश्वर ने उसे असीम दुख दिया था। वह दिव्यांग था। ...