20 दिसंबर 2011

जनलोक पाल भगाओ संधर्ष समिति।


     ज मंतर मंतर मुक्ताकाश मंच में जनलोक पाल भगाओ संधर्ष समिति की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता जाने माने  ढोलक डुग्गी राजा ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डुग्गी राजा ने कहा - मित्रों जिस तरह से इस देश के सर्वोच्च सत्ता  (मैडम) को चुनौती देने का प्रयास किया जा रहा है वह इस देश ही नहीं पूरी दुनिया के नेताओं के लिए खतरनाक है। आज इस बैठक का आयोजन मैडम एवं चिर युवा सह हाइजिनिक दलित प्रेमी युवराज के आदेश पर किया गया है। हमारी सबसे बड़ी चिंता इस विषय को लेकर है कि जिस देशवासियों ने हम जैसे  के भरोस  देश (दूध) की रखवाली का भार छोड़ रखा है उस पर से हमारा अधिकार छिन्ने का प्रयास एक बुढ़ा आदमी कर रहा है। साथियों बंाझ क्या जाने प्रसव पीड़ा का हाल उन्हें क्या पता कि कैसे कैसे तिकड़म और कितने काला धन को खर्च कर हम नोट को वोट में बदलते है और तब जाकर हमे यह अधिकार मिलता है और अब इसपर ही खतरा मंडराने लगा है इसलिए हमें एक जुट होकर इसका विरोध करना चाहिए। वहीं बैठक में अपने विचार व्यक्त करते हुए अधिक वक्ता टिम्पल जी ने कहा कि इस देश को इस जैसे बुढे आदमी से बचाना होगा और इसके लिए जरूरी है कि जनलोक पाल भगाओं संधर्ष समिति के बैनर तले हम लोग एक जुट होकर आंदोलनकारियों पर हमला करें और करायें। हलांकि कई हमले मैंने करा कर देख लिया पर मंुह की खानी पड़ी और जब हमलोगों ने बुढें की फैजी को केश मे फंसाने की कोशीश की तब भी कामयाबी नहीं मिली अतः अब हार कर इस बैठक में ही रणनीति तय कर हमला करना होगा। साथियों हमने मैडम के इशारे पर सोशल मीडिया पर भी अंकुश लगाने का प्रयास किया पर सब मिल कर चिल्लाने लगे। भला बताई, यह भी कोई बात हुई, सर हमार और धर कुत्ते का। वहीं बैठक में बोलते हुए पी चिंता हरण ने कहा कि मित्रों आज के समय जब हमारे प्रमुख फंड मैनेजरों को तिहाड़ की हवा खिला दी गई तब अब मेरे उपर भी विरोधी लग गए है। भला बताई 2 जी हो या 3 जी, जब तक फंड की व्यवस्था नहीं होगी तब तक हमलोग कैसे बार बार सिंहासन पर बैठ सकेगें।
इसी तरह के विचारो के साथ अन्त में बैठक में निर्णय लिया गया कि हर हाल में जनलोक पाल को लटकानों के लिए संधर्ष को तेज करना है वरना हम सभी लोगों को इतिहास कालीदास के रूप में जानेगा। इतनी मेहनत और मशक्त से यहां तक पहूंचते है और जब गंगा ही नहीं बहेगी तो  भला हाथ कैसे धोबेगें। बैठक में एक बाबू साहेब टाइप ने भी खड़ा होकर समिति के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह सब वही लोग करबा रहें है जिन्हें मौका नहीं मिला कमाने का। भला इसमें भ्रष्टाचार कहां कि कुछ पैसा लेकर किसी का काम समय पर कर दिया जाय। अजि महाराज जब नगद नारायण ही नहीं मिलेगा तब भला कौन बुरबक है जो ओवर टाइम करके काम का निवटारा करेगा।

कार्टून= साभार गुगल देवता

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