12 नवंबर 2015

कुम्हार और ईश्वर

कुम्हार और ईश्वर 
**
मिट्टी गूंध
चाक पे चढ़ाया
उसे धुमाया
सधे हाथ से
अंदर से सहारा दे
बाहर से दबाया
कुम्हार ने दीया बनाया।।

फिर उसे 
आग में पकाया
और बाजार ले आया।।

वही दीया
कोई मज़ार पे
कोई मंदिर में
कोई चमार घर
कोई बाभन घर जला..
***
हे कुम्हार
कहीं तुम ईश्वर तो नहीं...

ओशो के विचार: सुखी रहने के सफल मंत्र

ओशो के विचार, सुखी रहने का सफल मंत्र ** दुख पर ध्यान दोगे तो हमेशा दुखी रहोगे, सुख पर ध्यान देना शुरू करो। दअसल, तुम जिस पर ध्यान देते हो...